बड़गाईं जमीन घोटाला: सीएम हेमंत सोरेन की बढ़ीं मुश्किलें, PMLA कोर्ट में आरोप तय; 30 नवंबर से शुरू होगा ट्रायल
रांची: झारखंड के बहुचर्चित बड़गाईं जमीन घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को तगड़ा झटका लगा है। विशेष PMLA कोर्ट ने हेमंत सोरेन की डिस्चार्ज पिटीशन और आरोप गठन रोकने की मांग वाली अर्जी खारिज करते हुए उनके खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप (Charges) तय कर दिए हैं। इसके साथ ही अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में नियमित ट्रायल की प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत में सीएम हेमंत सोरेन शाम करीब 4:26 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए। अदालत ने जब उनके खिलाफ आरोप पढ़कर सुनाए, तो हेमंत सोरेन ने दो टूक कहा, "हुजूर, हम निर्दोष हैं और हमारे ऊपर लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह निराधार हैं"। हालांकि, अदालत ने दलीलों को खारिज करते हुए आरोप तय कर दिए और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को अगली सुनवाई पर गवाह पेश करने का आदेश दिया। अब मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर को होगी।
अभियोजन के अनुसार, हेमंत सोरेन ने 2010 से 2024 के बीच पद और प्रभाव का दुरुपयोग कर बड़गाईं के शांति नगर में 8.86 एकड़ जमीन पर कब्जा किया। आरोप है कि तत्कालीन राजस्व उप-निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद की मिलीभगत से इसे वैध कराने, बैंक्वेट हॉल का साइट प्लान तैयार कराने और बिजली कनेक्शन लेने का खेल रचा गया।
हाईकोर्ट से भी नहीं मिली राहत
दूसरी तरफ, झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने भी निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया। अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि हाईकोर्ट में मामला लंबित होने का हवाला देकर ईडी कोर्ट से समय नहीं लिया जा सकता